मेंस्ट्रुअल साइकिल (मासिक धर्म) की स्टेज और बहुत कुछ

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मेंस्ट्रुअल साइकिल में चार फेज़ होते हैं और 24 से 38 दिनों के बीच खत्म होते हैं। आइए जानें कि हर फेज़ शरीर पर किस तरह असर करता है

मेंस्ट्रुअल साइकिल का मतलब सिर्फ हर महीने पीरियड आना ही नहीं है, इसमें और भी बहुत कुछ शामिल है। इस सरल गाइड से आपको इस टॉपिक से जुड़े हर सवाल का जवाब मिलेगा।

मेंस्ट्रुअल साइकिल क्या है और इसमें कौन-कौन सी अवस्थाएँ होती हैं?

आपकी मेंस्ट्रुअल साइकिल आपके पिछले पीरियड के पहले दिन से शुरू होकर अगले पीरियड के पहले दिन तक चलती है। मेंस्ट्रुअल साइकिल का समय हर महिला के लिए अलग होता है, लेकिन साइकिल में लगने वाला औसत समय 24 से 28 दिनों के आसपास होता है।

पीरियड साइकिल की लंबाई भी बढ़ती-घटती रहती है - यह आपके मेनार्च (जब प्यूबर्टी के दौरान आपके पीरियड पहली बार आते हैं) और मेनोपॉज़ (जब आपके पीरियड हमेशा के लिए रुक जाते हैं) के बीच बदलती रहती है।

एक महिला की मेंस्ट्रुअल साइकिल में शामिल होकर उसे प्रभावित करने वाले ख़ास तत्व, आपके दिमाग, फ़ीमेल हॉर्मोन - एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन, यूटेरस और ओवरी के बीच एक जटिल पारस्परिक क्रिया करते हैं।

पियूष ग्रंथि जो आपके दिमाग के मूल में स्थित होती है, आपकी ओवरी को एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन निकालने के लिए संकेत देती है जोकि आपके शरीर को आने वाली प्रेगनेंसी के लिए तैयार करते हैं। इस तरह से मेंस्ट्रुअल साइकिल की शुरुआत होती है जो चार मुख्य अवस्थाओं में आगे बढ़ती है:

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  • मेंस्ट्रुएशन:
    इस अवस्था के दौरान, रक्त, म्यूकस, और यूटेरिन लाइनिंग की कोशिकाओं से बना एक मेंस्ट्रुअल फ्लुइड वजाइनल ओपनिंग के द्वारा बाहर निकल जाता है। इसका मतलब है कि आपका पीरियड शुरू हो चूका है जोकि 2 से 7 दिनों तक रह सकता है।
  • फॉलिक्युलर अवस्था:
    आपके मेंस्ट्रुअल साइकिल की फॉलिक्युलर अवस्था आपके पीरियड के पहले दिन से शुरू होकर ओव्यूलेशन तक चलती है। इस अवस्था में एस्ट्रोजन लेवल बढ़ते हैं, और ओवरी संभावित फ़र्टिलाइज़ेशन के लिए एक एग बाहर छोड़ती है।
    फॉलिक्युलर अवस्था ही उस अवस्था को बढ़ावा देती है, जिसमें यूटेरिन लाइनिंग फिर से बनने लगती है।
  • ओव्यूलेशन (अण्डोत्सर्ग): इस अवस्था में ओवरी एग निकालती हैं। यह एग फेलोपियन ट्यूब से होकर गुजरता है और आपकी यूटेरस की दीवारों के साथ-साथ लाइनिंग पर चिपक जाता है।
    आमतौर पर यह अवस्था आपके पीरियड शुरू होने के दो हफ़्तों पहले होती है। इस प्रक्रिया के दौरान एस्ट्रोजेन लेवल बढ़ जाते हैं और उतनी ही जल्दी नीचे भी गिर जाते हैं।
    इस एग की उम्र लगभग 24 घंटे होती है। इस समय या तो यह किसी स्पर्म के द्वारा फ़र्टिलाइज़ हो जाता है और अगर ऐसा नहीं हुआ तो ये मर जाता है और टूटकर यूटेरिन लाइनिंग के साथ बाहर निकल जाता है।
  • ल्युटील अवस्था (पीतपिंड प्रावस्था): ऐसी अवस्था जो ओव्यूलेशन और आपके पीरियड के पहले दिन के बीच में होती है, उसे ल्युटील अवस्था कहते हैं। इस अवस्था के दौरान प्रोजेस्ट्रोन का लेवल बढ़ता है जोकि यूटेरिन लाइनिंग की मोटाई को बनाकर रखने के लिए ज़रूरी होता है जिससे फ़र्टिलाइज़्ड एग को पोषण मिल सके। अब, अगर इस समय के दौरान प्रेगनेंसी नहीं होती है, तो प्रोजेस्ट्रोन के लेवल कम होने लगते हैं। जिसकी वजह से यूटेरिन लाइनिंग टूट जाती है, और मेंस्ट्रुअल फ्लूइड के साथ बाहर निकल जाती है।

मेंस्ट्रुअल साइकिल को क्यों ट्रैक करें? मैंस्ट्रुअल साइकिल को कैसे ट्रैक करें?

अगर एकदम मूल बात करें, तो मेंस्ट्रुअल साइकिल पर नज़र रखने/को ट्रैक करने से आप आने वाले पीरियड के लिए पहले से तैयार रह सकते हैं। लेकिन मेंस्ट्रुअल साइकिल को ट्रैक करने से आपको और भी कई बातों में मदद मिल सकती है।

उदाहरण के लिए, अगर आपको ये पता है कि आपकी साइकिल से जुड़े लक्षण क्यों होते हैं, तो आप पहले से सही प्रोडक्ट के साथ उसके लिए तैयार रह सकते हैं।आप अपनी मेंस्ट्रुअल साइकिल की किस अवस्था पर हैं, उसके आधार पर सम्भोग के समय आपको कुछ अलग महसूस हो सकता है, आपका पेट फूल सकता है, सिरदर्द, मुहांसे, पाचन से संबंधित समस्याएं, आदि महसूस हो सकती हैं। कई महिलाओं ने ये भी बताया है कि मेंस्ट्रुअल साइकिल उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डालती है।

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आप किसी डायरी में अपनी पीरियड की तारीख लिख सकती हैं या कैलेंडर में उनको चिह्न्नित कर सकती हैं, ताकि आपका अगला पीरियड कब आ सकता है ये समझने और उसके हिसाब से प्लान करने में आपको मदद मिल सके। तकनिकी विकास की वजह से मेंस्ट्रुअल साइकिल को ट्रैक करना और भी आसान हो गया है। इसे आप अपने स्मार्टफोन पर एक आसान सी पीरियड ट्रैकिंग ऐप को डाउनलोड करके भी कर सकते हैं।

अपनी मेंस्ट्रुअल साइकिल का आकलन कैसे करें?

महिलाओं के लिए मेंस्ट्रुअल साइकिल एक निजी अनुभव होता है। हर महिला को अलग अनुभव होता है, इसलिए पीरियड का आकलन करना बेहतर होता है। मेंस्ट्रुअल साइकिल का आकलन करने के लिए आपको अपने पीरियड के पहले दिन से शरू करते हुए पीरियड के आखिरी दिन तक गिनती करें वो भी अगले पीरियड के आने से पहले। हालाँकि, आपको ये भी पता होना चाहिए कि मेंस्ट्रुअल साइकिल कई कारणों से अलग हो सकती है।

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उदाहरण के लिए, अगर आपका पीरियड पहली जनवरी को शुरू और 5 जनवरी को ख़त्म होता है, तो आपक अपनी मेंस्ट्रुअल साइकिल को 1 जनवरी से गिनते हुए अगले पीरियड के आने तक इसकी गिनती करेंगी। और अगर आपका अगला पीरियड 30 जनवरी को आया तो आपकी मेंस्ट्रुअल साइकिल 1 जनवरी से शुरू होकर 30 जनवरी तक रहेगी, जिसका मतलब है कि आपकी मेंस्ट्रुअल साइकिल 30 दिनों की है।

यह याद रखना बहुत ज़रूरी है कि पीरियड से पहले की स्पॉटिंग को आपके पीरियड के पहले दिन के रूप में नहीं गिना जा सकता है। आपका पीरियड तभी शुरू होता है जब आपमें नियमित रूप से ब्लीडिंग होती है।

मेंस्ट्रुअल साइकिल में आने वाली अनियमितताओं के क्या कारण हैं?

अगर आप अपनी मेंट्रूअल साइकिल पर गौर से ध्यान दें, तो आप उससे जुड़ी अनियमितताएं और एटीपिकल पीरियड्स/असामान्य पीरियडको बड़ी आसानी से समझ सकते हैं।

यहाँ अगर आपका पीरियड एक बार रह जाए, देर से आये या जकड़ी आ जाए तो घबराने की कोई बात नहीं है, लेकिन अगर आपकी मेंस्ट्रुअल साइकिल लगातार अनियमितता दर्शा रही है, तब आपको अपनी गायनेकोलॉजिस्ट को दिखा लेना चाहिए।

पीरियड की अनियमितता के लिए कई कारण हो सकते हैं। इनमें से कुछ हैं:

  • प्रेगनेंसी/गर्भावस्था: अगर आप सेक्सुअली एक्टिव (लैंगिक रूप से सक्रीय) हैं और आपका पीरियड नहीं आया है, तो हो सकता है कि आप गर्भवती/प्रेगनेंट हों। लेकिन एक बार पीरियड के नए आने का मतलब ये भी नहीं है की आप गर्भवती हों ही। प्रेगनेंसी के शुरूआती लक्षणों जैसे टेंडर ब्रैस्ट, बहुत ज़्यादा थकान, मॉर्निंग सिकनेस, उल्टी आना, आदि का ध्यान रखें और इस दुविधा के समाधान के लिए होम प्रेगनेंसी टेस्ट करें।
  • हॉर्मोन से जुड़ी अनियमितता/हॉर्मोनल इम्बैलेंस: कुछ रिसर्च यह भी बताती है कि मेंस्ट्रुएशन (माहवारी) से जुड़ी अनियमितताओं का सीधा संबंध हार्मोनल डिसऑर्डर जैसे हाइपर या हाइपोथायरॉइडिज़्म से है। अगर मेंस्ट्रुअल अनियमितताओं के साथ-साथ आपको अचानक अपने वजन में कमी या बढ़ोत्तरी दिखे, बाल झड़ें, या इर्रिटेबल बॉवेल हो तो बेहतर होगा कि आप अपने डॉक्टर को दिखाएं।
  • पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम: पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम या पीसीओएस का सबसे आम लक्षण है अनियमित पीरियड। इसके अलावा जिन लक्षणों का आपको ध्यान रखना होगा, वो हैं - वजन बढ़ना, अत्यधिक बाल झड़ना, चेहरे पर बहुत सारे बाल आना, शरीर पर ज़्यादा बाल उगना, आदि।
  • तनाव/चिंता: तनाव और एंग्जायटी आपकी मेंस्ट्रुअल साइकिल पर असर डालते हैं - चाहे वह मेंस्ट्रुअल साइकिल से जुड़ी अनियमितताएँ हों, पीरियड में देरी हो, या फिर छोटी मेंस्ट्रुअल साइकिल हों। इन सबमें से जो महिलाएं ज़्यादा चिंता करती हैं, उनमें मेंस्ट्रुअल अनियमितता का दिखना बहुत आम है।

मेंस्ट्रुअल साइकिल में होने वाली अनियमितताओं से कैसे बचें?

ऐसी कई विज्ञान से जुड़े नुस्खे हैं, जो आपकी मेंस्ट्रुअल साइकिल की अनियमितता को नियमित बनाने में आपकी मदद कर सकते हैं, जैसे योगा, इफेक्टिव स्ट्रेस मैनेजमेंट (असरदार तनाव प्रबंधन), रोज़ कसरत करना, और सही भोजन लेना। हालाँकि अगर फिर भी यह लक्षण बने रहते हैं तो अपने डॉक्टर से मिलें और एक सही ट्रीटमेंट प्लान लें जो आपकी इस परेशानी को जड़ से ख़त्म कर दे।

मेंस्ट्रुअल अनियमितताओं से छुटकारा पाने के लिए आपको कहाँ से मदद मिल सकती है?

मेंस्ट्रुअल साइकिल पर नज़र रखने से आपको शुरुआती चेतावनी के संकेत समझने में मदद मिल सकती है। आप फिर अपने डॉक्टर से अपॉइंटमेंट ले सकती हैं और आपके लक्षणों के आधार पर आपके डॉक्टर जीवन शैली में बदलाव, साइकिल को नियमित करने के लिए दवाइयाँ, या दोनों का कॉम्बिनेशन बनाकर इलाज कर सकते हैं। यह बहुत ज़रूरी है कि इन संकेतों को नज़रअंदाज़ ना करें और चुप रहकर इसे न सहें। आपकी मेंस्ट्रुअल साइकिल की अनियमितता का जो भी कारण हो, आपकी गायनेकोलॉजिस्ट उसको समझने और सुलझाने में पूरी तरह से प्रशिक्षित है।

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